स्मार्ट सिटी या ‘मवेशीपुर’? हाईकोर्ट की फटकार भी बेअसर, बिलासपुर की सड़कों पर मौत का साया ..

बिलासपुर : ‘स्मार्ट सिटी’ का तमगा ओढ़े बिलासपुर की जमीनी हकीकत इन दिनों बेहद बदसूरत और खौफनाक हो चुकी है। विकास के बड़े-बड़े दावों को मुंह चिढ़ाते हुए शहर की मुख्य सड़कों, व्यस्ततम चौराहों और फ्लाइओवर पर अब आवारा मवेशियों का एकछत्र राज है। हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणियों और सख्त निर्देशों के बावजूद नाकारा प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है, जिसका खामियाजा आम जनता को अपनी जान जोखिम में डालकर चुकाना पड़ रहा है।
आंकड़े बताते हैं कि जिले में 25 हजार से अधिक आवारा मवेशी सड़कों पर यमदूत बनकर घूम रहे हैं। दिन हो या रात, अचानक सामने आते मवेशियों से टकराकर रोजाना दोपहिया वाहन चालक लहूलुहान हो रहे हैं। कागजों में चल रही गौशालाएं और सरकारी योजनाएं सिर्फ बजट ठिकाने लगाने का जरिया बनकर रह गई हैं। नगर निगम का ‘सघन अभियान’ महज एक छलावा साबित हो रहा है।
इस गंभीर मानवीय संकट पर भी शर्मनाक सियासत जारी है। कांग्रेस जहां गौठान योजना की नाकामी का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं महापौर पूजा विधानी कार्रवाई के थोथे दावे कर पल्ला झाड़ रही हैं।
बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस अनदेखी और मौतों का जिम्मेदार कौन है? जब तक कागजी खानापूर्ति छोड़कर कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक बिलासपुर की ये सड़कें शहरवासियों के लिए रोज एक नया कालचक्र बुनती रहेंगी।




