केंद्रीय जेल बिलासपुर: मौतों का ‘ब्लैक होल’, एक महीने में चौथी बलि के बाद उठे तीखे सवाल ..

बिलासपुर। केंद्रीय जेल बिलासपुर इस वक्त कैदियों के लिए सुरक्षित शरण स्थली नहीं, बल्कि एक खतरनाक ‘डेथ ट्रैप’ साबित हो रही है। सोमवार को पॉक्सो एक्ट के 31 वर्षीय कैदी प्रभु कुमार मनहर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने जेल प्रशासन के खोखले दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। सीने में दर्द की शिकायत के बाद सिम्स अस्पताल ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक ही महीने के भीतर जेल की सलाखों के पीछे यह चौथी मौत कैसे हो गई?
जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी भले ही इसे सामान्य बीमारी बताकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का पल्ला झाड़ रहे हों, लेकिन लगातार हो रही इन मौतों ने जेल की लचर स्वास्थ्य सुविधाओं और बदहाल सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पिछले 30 दिनों के भीतर एक कैदी की सरेआम हत्या हो जाती है, जबकि तीन अन्य की मौत बीमारी या संदिग्ध रूप से फिसलकर गिरने से हो जाती है। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि जेल प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही और कैदियों की निगरानी में बरती जा रही घोर कोताही का जीता-जागता प्रमाण है।
जेल के भीतर चल रहे इस खूनी खेल और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ अब जनता और मानवाधिकारों का आक्रोश भड़क उठा है। क्या जेल प्रशासन केवल लाशें गिनने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करने के लिए बैठा है? कैदियों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। बिलासपुर जेल की इस संदेहास्पद कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच तत्काल जरूरी है, ताकि सलाखों के पीछे छिपे असली गुनहगार बेनकाब हो सकें।




