बिलासपुर

बाल संप्रेक्षण गृह में चौकीदार की बेरहमी से हत्या, चार नाबालिग आरोपी फरार!सुरक्षा व्यवस्था को दिया मात…

बिलासपुर : कानून व्यवस्था और सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ाते हुए बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। यहां गंभीर अपराधों में बंद 4 नाबालिग बंदियों ने दुस्साहस की सारी हदें पार करते हुए रात्रि चौकीदार नरेंद्र कुमार खाण्डे को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया और मौके से फरार हो गए। इस सनसनीखेज वारदात ने बाल संप्रेक्षण गृह की खोखली सुरक्षा और पुलिसिया चौकसी पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाथ-पैर बांधकर घोंटा गला, मुंह में ठूंसा कपड़ा
परिजनों के मुताबिक, यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि एक सोची-समझी क्रूर हत्या है। आरोपियों ने चौकीदार नरेंद्र के हाथ-पैर गमछे से बांधे, उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की और फिर मुंह में कपड़ा ठूंसकर गला दबा दिया। सवाल यह उठता है कि जब इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया जा रहा था, तब विभाग के अन्य कर्मचारी और सुरक्षा तंत्र कहां सोया हुआ था? क्या परिसर में कोई अलार्म या बैकअप सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी?
सिस्टम की लापरवाही ने ली जान!
मृतक के परिजनों ने विभागीय अधिकारियों पर भी तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। बताया जा रहा है कि नरेंद्र कुमार खाण्डे लंबे समय से अपनी जान को खतरा बताते हुए तबादले की गुहार लगा रहे थे, लेकिन संवेदनहीन प्रशासन फाइलों को दबाए बैठा रहा। अगर समय रहते उनकी अर्जी पर गौर किया जाता, तो आज एक मासूम जान बच सकती थी।
गंभीर मामलों के बंदी थे आरोपी
वारदात को अंजाम देने वाले 4 नाबालिगों में से 3 रायगढ़ और 1 कोरबा जिले के हैं, जो पहले से ही संगीन जुर्मों के आरोप में यहां बंद थे। ऐसे खतरनाक बैकग्राउंड वाले बंदियों की निगरानी के लिए महज एक चौकीदार के भरोसे पूरा परिसर छोड़ देना प्रशासन की आपराधिक लापरवाही को दर्शाता है।
फिलहाल, कलेक्टर और एसएसपी समेत डॉग स्क्वायड की टीम मौके पर जांच कर रही है, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि सुधार गृह खुद भगवान भरोसे चल रहे हैं। जब रक्षक ही सुरक्षित नहीं, तो व्यवस्था पर भरोसा कैसे किया जाए?

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