
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बहुचर्चित मस्तूरी गोलीकांड मामले में आरोपियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने मामले के मुख्य साजिशकर्ता समेत चार आरोपियों की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि महज ‘मेमोरेंडम कथन’ और ‘सीडीआर’ (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) के आधार पर किसी भी आरोपी को लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रखना उचित नहीं माना जा सकता।
क्या था पूरा मामला?
यह सनसनीखेज वारदात मस्तूरी थाना क्षेत्र के जनपद पंचायत कार्यालय के भीतर घटित हुई थी। देर रात बाइक पर सवार होकर आए तीन नकाबपोश बदमाशों ने वहां मौजूद किरारी निवासी राजू सिंह और चंद्रकांत पर ताबड़तोड़ 10 से 12 राउंड फायरिंग कर दी थी। इस अचानक हुए हमले से कार्यालय में भगदड़ मच गई थी। घटना के वक्त जनपद उपाध्यक्ष नितेश ठाकुर भी वहीं मौजूद थे। इस जानलेवा हमले में दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें नाजुक हालत में बिलासपुर के अपोलो अस्पताल भर्ती कराया गया था।
इन आरोपियों को मिली जमानत
वारदात के बाद पुलिस ने सघन जांच करते हुए इसे पुरानी रंजिश और सुपारी किलिंग से जोड़कर देखा था। मामले में पुलिस ने अकबर खान, देवेश सुमन, मुस्तकीम और मतीन को गिरफ्तार कर मुख्य आरोपी बनाया था।
अब हाईकोर्ट ने पुलिस के साक्ष्यों को नाकाफी मानते हुए सभी चारों आरोपियों को बेल दे दी है। अदालत के इस फैसले के बाद यह हाई-प्रोफाइल मामला एक बार फिर कानूनी गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, आरोपियों को फिलहाल राहत मिल गई है, लेकिन मामले का ट्रायल कोर्ट में आगे भी जारी रहेगा।




