सौहार्द की मिसाल: बिलासपुर मुस्लिम समाज ने की गौमाता को “राष्ट्रमाता” घोषित करने की मांग..

बिलासपुर। गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक सौहार्द की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर बिलासपुर से सामने आई है। यहाँ मुस्लिम समाज ने देश में आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता की एक नई मिसाल पेश करते हुए केंद्र सरकार से गौमाता को **”राष्ट्रमाता“** घोषित करने की मांग की है। समाज के प्रतिनिधियों ने इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने का विनम्र निवेदन किया है।
बिलासपुर मुस्लिम समाज का मानना है कि भारत की सनातन परंपरा, संस्कृति और करोड़ों हिंदू भाई-बहनों की आस्था में गाय का स्थान सर्वोच्च है। हिंदू समाज सदियों से गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि मातृत्व, करुणा और सेवा का साक्षात प्रतीक मानता आया है।
“अभिलेखों में स्थान मिलना केवल पहचान नहीं, बल्कि सम्मान है”
हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा था कि *”गाय माता है और यह जन्म-जन्म का नाता है, इसे घोषित करने की आवश्यकता नहीं है।”* मुस्लिम समाज ने उनके इस कथन का पूरा सम्मान करते हुए एक बेहद तार्किक और दिल छू लेने वाली बात कही है:
“हर संतान अपनी मां को मां मानती है, लेकिन फिर भी सरकारी दस्तावेजों और स्कूलों में माता का नाम दर्ज किया जाता है। यह केवल एक पहचान नहीं, बल्कि मां के प्रति सर्वोच्च सम्मान और वैधानिक स्वीकृति का प्रतीक है।”
ठीक इसी तरह, यदि हिंदू समाज गाय को दिल से माता मानता है, तो उसे राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक रूप से “राष्ट्रमाता” का दर्जा मिलना ही चाहिए।
सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का संदेश
मुस्लिम समाज के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि उनकी यह मांग हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं के प्रति गहरे आदर, राष्ट्रीय एकता और आपसी भाईचारे से प्रेरित है। यदि सरकार इस दिशा में संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया शुरू करती है, तो इससे न केवल गौवंश की रक्षा और संवर्धन को नया बल मिलेगा, बल्कि समाज में सांप्रदायिक सौहार्द का एक नया युग शुरू होगा।




