
बिलासपुर। न्यायधानी का चर्चित निजी अस्पताल अपोलो इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन कारण चिकित्सा सेवा नहीं बल्कि गरीबों के साथ हो रहा अन्याय है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को ठेंगा दिखाते हुए अस्पताल प्रबंधन ने गरीब व मध्यमवर्गीय मरीजों को इलाज से वंचित कर दिया है। हालात इतने खराब हैं कि कई परिवार इलाज के लिए जमीन-जायदाद बेच रहे हैं, तो कुछ ने मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिए।
विधायक की फटकार, कांग्रेस जिला अध्यक्ष की चेतावनी और स्वास्थ्य विभाग के कई पत्रों के बावजूद अपोलो प्रबंधन अपने रुख पर अड़ा हुआ है। करीब छह माह पहले विधायक ने साफ कहा था — “गरीबों को आयुष्मान योजना का लाभ दो, वरना अस्पताल बंद करो।” इसके बाद भी अस्पताल ने न कोई जवाब दिया, न ही योजना लागू की। फर्जी डॉक्टर द्वारा मरीज की मौत के मामले के बाद कांग्रेस ने आंदोलन किया, न्याय यात्रा निकाली, पर नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा — “अपोलो गरीबों का हक़ मार रहा है, यह अब केवल अमीरों का अस्पताल बन चुका है।” स्वास्थ्य विभाग के पूर्व सीएमएचओ प्रमोद तिवारी और वर्तमान सीएमएचओ शुभा गढ़ेवाल ने कई बार पत्र भेजे, लेकिन प्रबंधन ने किसी की परवाह नहीं की।
आयुष्मान कार्ड लेकर पहुंचने वाले गरीब मरीजों को हर रोज यह कहकर लौटा दिया जाता है कि “यहां योजना लागू नहीं है।” लोगों का कहना है कि सरकार योजनाओं का प्रचार तो खूब करती है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं दिखता। जनता सवाल उठा रही है — क्या यह कमजोर प्रशासन और ढीले विपक्ष की वजह नहीं कि शहर की जनता अपने ही अस्पताल में इलाज के लिए तरस रही है? अपोलो अब इलाज का नहीं, “अहंकार का प्रतीक” बन चुका है।




