
बिलासपुर में जमीन से जुड़े विवाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं। निजी जमीन ही नहीं, बल्कि शासकीय भूमि पर भी अवैध कब्जे के मामले सामने आ रहे हैं। अनुमानतः जिले में 60 से 70 प्रतिशत विवाद जमीन कब्जे से जुड़े हैं, जहां गरीब और आम नागरिक अपनी ही जमीन के लिए कोर्ट, तहसील और पटवारी कार्यालयों के चक्कर काटते-काटते थक जाते हैं, लेकिन उन्हें समय पर न्याय नहीं मिल पाता। ऐसे में जमीन माफियाओं के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं।
इसी बीच ग्राम डंगनिया का एक मामला चर्चा में है। ग्राम बिनैका निवासी प्रियंका चतुर्वेदी ने कलेक्टर बिलासपुर को आवेदन देकर निस्तारी रास्ते पर हो रहे अवैध कब्जे को हटाने और निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। आवेदन के अनुसार खसरा नंबर 297 के सामने स्थित शासकीय भूमि, जो वर्षों से आम रास्ते के रूप में उपयोग हो रही थी, उस पर गांव के शांतिलाल द्वारा अवैध निर्माण किया जा रहा है।
आवेदिका ने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले मस्तूरी तहसील में की जा चुकी है, जहां तहसीलदार ने निर्माण रोकने का आदेश भी दिया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी है, जिससे किसानों को खेतों तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है और कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है। साथ ही पटवारी और तहसीलदार पर मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं।
यह स्थिति “चैतू-बैशाखू” की कहानी जैसी प्रतीत होती है, जहां पीड़ित लोग लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन समाधान नहीं मिलता। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है।




