साय साय बढ़ गे मंहगाई रिकॉर्ड तोड़ दिश:घरेलू गैस सिलेंडर फिर 29 रुपय महंगा .

Bilaspur / महंगाई की चौतरफा मार झेल रही जनता के जख्मों पर एक बार फिर नमक छिड़का गया है। पेट्रोलियम कंपनियों ने घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में ₹29 की एक और कमरतोड़ बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें रविवार से लागू हो चुकी हैं, जिसने हर आम और खास परिवार के बजट को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है।
यह कोई पहला झटका नहीं है, बल्कि पिछले तीन महीनों में यह लगातार तीसरा बड़ा हमला है। महज 90 दिनों के भीतर रसोई गैस की कीमतों में लगभग ₹90 का इजाफा हो चुका है। पहले से ही आसमान छूते पेट्रोल और डीजल के दामों से त्रस्त मध्यम और गरीब वर्ग के लिए यह बढ़ोतरी किसी ‘डेथ वारंट’ से कम नहीं है। एक तरफ आय लगातार घट रही है, तो दूसरी तरफ रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतें आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय बहानेबाजी और घरेलू हकीकत हमेशा की तरह कंपनियों और हुक्मरानों के पास ‘अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता’ और ‘पश्चिम एशिया का तनाव’ जैसे रटे-रटाए बहाने तैयार हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वैश्विक संकटों का पूरा बोझ सिर्फ देश की गरीब जनता की जेब पर ही डाला जाएगा? जब बाजार में गैस की कोई किल्लत नहीं है, तो घरेलू सिलेंडरों पर यह बेतहाशा मुनाफाखोरी क्यों?
विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है, लेकिन दावों और वादों की राजनीति के बीच पिस केवल आम नागरिक रहा है। इस तीखी बढ़ोतरी ने यह साफ कर दिया है कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों को जनता की थाली के छिनते निवाले और सुलगती रसोई से कोई सरोकार नहीं रह गया है। महंगाई का यह वार अब सीधे आम आदमी के वजूद पर है।




