न्यायधानी बिलासपुर अब ‘चाकूधानी’:जनता लहूलुहान! अमेरी के बुजुर्ग पर चाकू से हमला .

Bilaspur / न्यायधानी बिलासपुर अब ‘चाकूधानी’ बनती जा रही है। शहर में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब पुलिस का खौफ सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है। आए दिन शहर की सड़कों पर बहता खून इस बात की गवाही दे रहा है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर है।
ताजा मामला सकरी थाना क्षेत्र के अमेरी का है, जिसने पुलिसिया गश्त और सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। यहाँ 60 वर्षीय बुजुर्ग रमेश गेंदले का कसूर सिर्फ इतना था कि वे इंसानियत के नाते पड़ोसियों के बीच हो रहे विवाद को शांत कराने पहुंचे थे। लेकिन बिलासपुर के बेलगाम बदमाशों को अब न तो सफेद बालों का लिहाज है और न ही कानून का डर। आरोपी सत्यप्रकाश सुनहरे ने आव देखा न ताव, बुजुर्ग के पेट में चाकू घोंप दिया। बुजुर्ग सिम्स अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
आखिर कब जागेगी बिलासपुर पुलिस?
- खो गया खाकी का खौफ: जब बीच-बचाव करने वाले बुजुर्ग सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता खुद को कैसे महफूज समझे?
- दिखावे की कार्रवाई: घटना के बाद पुलिस लकीर पीटते हुए आरोपी को गिरफ्तार तो कर लेती है, लेकिन ऐसी वारदातों पर ‘प्रिवेंटिव एक्शन’ (रोकथाम) क्यों नहीं होता?
- सवालों के घेरे में गश्त: शहर के चौक-चौराहों पर पुलिस की मौजूदगी सिर्फ चालान काटने के लिए है या अपराधियों में डर पैदा करने के लिए?
बिलासपुर पुलिस को अब खोखले आश्वासनों और कागजी आंकड़ों से बाहर निकलकर अपराधियों पर कड़ा प्रहार करना होगा। अगर अपराधियों की रीढ़ नहीं तोड़ी गई, तो जनता का कानून से भरोसा उठना तय है। आखिर कब रुकेगा यह खूनी खेल?




