
बिलासपुर / लिंगियाडीह दुर्गा नगर वार्ड क्रमांक 52 में रहने वाले 113 परिवारों के सिर पर एक बार फिर उजड़ने का खतरा मंडरा रहा है। नगर निगम बिलासपुर द्वारा यहां के मकानों को तोड़कर पार्क और कॉम्प्लेक्स बनाने की तैयारी की जा रही है। इस कार्रवाई से इलाके में भय और नाराजगी का माहौल है।
निवासियों का कहना है कि वे 4 से 5 पीढ़ियों से इस भूमि पर रह रहे हैं। 1982 में मजदूरों ने अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए सरकारी भूमि पर घर बनाकर स्थायी निवास कर लिया था। जीवन-यापन के लिए मेहनत-मजदूरी कर आज तक यही उनका घर है। उन्होंने बताया कि यह भूमि पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के शासनकाल में आबादी भूमि घोषित की गई थी।
लिंगीयाडीह में चल रहा है रहस्यमय लुका-छिपी का खेल! लोग पूछ रहे हैं—आखिर कौन है वो जो यहाँ बार-बार चक्कर लगा रहा है? कहीं किसी का दिल तो नहीं अटक गया लिंगीयाडीह की गलियों में?
वर्ष 2019 में छत्तीसगढ़ शासन ने दुर्गा नगर क्षेत्र के पात्र परिवारों को पट्टा देने का निर्णय लिया था। शासन के निर्देश पर अतिरिक्त तहसीलदार द्वारा सूची भी तैयार की गई और नागरिकों ने नगर निगम को ₹10 प्रति वर्गफुट की दर से प्रीमियम राशि जमा की। इसके बावजूद निगम अब उसी भूमि पर कॉम्प्लेक्स और पार्क निर्माण की योजना बना रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र मास्टर प्लान में आवासीय श्रेणी में दर्ज है, फिर भी निगम बार-बार सर्वे और तोड़फोड़ की तैयारी में जुटा है। पिछले चार महीनों में सड़क चौड़ीकरण, नाला निर्माण और अब कॉम्प्लेक्स विकास के नाम पर बार-बार सर्वे किए गए, जिससे नागरिकों में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।

निवासियों ने कहा कि कुछ महीने पहले ही 150 मकानों को सड़क चौड़ीकरण के नाम पर तोड़ा गया था, पर अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। अब फिर से तोड़फोड़ की बात कही जा रही है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कर प्रभावित परिवारों को स्थायी आवास सुरक्षा दी जाए।




