सड़क पर भ्रष्टाचार: 36 लाख की सीसी रोड एक महीने में जमींदोज, मंत्री के विभाग पर उठे गंभीर सवाल!

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में विकास के दावों के बीच भ्रष्टाचार का एक ऐसा नग्न नाच सामने आया है, जिसने सिस्टम की साख को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है। बिलासपुर जिले के कोटा और मस्तूरी के आमाकोनी में हुए घपलों की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि अब तखतपुर क्षेत्र का गनियारी गांव भ्रष्टाचार का नया अखाड़ा बन गया है। यहाँ मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना (MMGSY) के तहत जनता की गाढ़ी कमाई के करीब 36 लाख रुपए पानी की तरह बहा दिए गए, और महज एक महीने के भीतर ही चमचमाती सीसी रोड ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।
सड़क की यह बदहाली साफ गवाही दे रही है कि निर्माण में गुणवत्ता और तय मानकों की धज्जियां किस बेरहमी से उड़ाई गई हैं। यह सड़क नहीं, बल्कि पीडब्ल्यूडी विभाग और ठेकेदारों की जुगलबंदी से खड़ी की गई भ्रष्टाचार की एक ऐसी दीवार है, जो पहली ही आजमाइश में ढह गई।
जनता का फूटा गुस्सा, सिस्टम की तानाशाही को चुनौती
ग्रामीणों का आक्रोश अब सातवें आसमान पर है। उनका सीधा आरोप है कि गनियारी में विकास की चादर नहीं, बल्कि खुलेआम भ्रष्टाचार की परत बिछाई गई है। जगह-जगह उभर आए ये गड्ढे महज सड़क का टूटना नहीं, बल्कि जनता के भरोसे पर लगे गहरे जख्म हैं। इस तानाशाही रवैये और घटिया निर्माण से तंग आकर ग्रामीणों ने सड़क की दुर्दशा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
आज आक्रोशित ग्रामीणों का हुजूम सीधे जिला कलेक्टर कार्यालय आ धमका। उन्होंने अपनी आवाज बुलंद करते हुए इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों व निर्माण एजेंसी पर कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
घिरे लोक निर्माण मंत्री: जवाबदेही से कब तक बचेंगे?
यह पूरा मामला अब एक बड़ा राजनीतिक बवंडर बनता जा रहा है। चूंकि लोक निर्माण विभाग (PWD) जैसा महत्वपूर्ण महकमा खुद सूबे के कद्दावर नेता और डिप्टी सीएम अरुण साव के पास है, इसलिए उंगलियां सीधे उनके विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रही हैं। जनता अब तीखे सवाल पूछ रही है कि मंत्रियों और आला अफसरों के नाक के नीचे आखिर इस तरह की तानाशाही और अंधेरगर्दी कैसे चल रही है? क्या ठेकेदारों को किसी रसूखदार का खुला संरक्षण प्राप्त है?
इस शर्मनाक घटना ने साफ कर दिया है कि नीचे से लेकर ऊपर तक भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। अब देखना यह है कि बड़ी-बड़ी बातें करने वाले जिम्मेदार इस खुली लूट पर क्या एक्शन लेते हैं, या फिर हमेशा की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।




