मॉल संचालकों की तानाशाही: उपभोक्ता फोरम के आदेश को ठेंगा, बिलासपुर में ‘अवैध’ पार्किंग वसूली जारी .

बिलासपुर। नियम-कानून सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए नहीं होते, लेकिन बिलासपुर के मॉल संचालकों को शायद ऐसा ही लगता है। रायपुर उपभोक्ता फोरम ने साफ शब्दों में आदेश दिया था कि मॉल परिसरों में पार्किंग कोई लग्जरी नहीं, बल्कि बुनियादी व्यवस्था है और इसके लिए जनता से अलग से शुल्क वसूलना सरासर गलत है। इसके बावजूद, बिलासपुर के मौल में धड़ल्ले से 10 से 30 रुपये तक की अवैध वसूली जारी है। इसे आदेश की अवहेलना कहें या प्रशासन का खौफ खत्म होना?
आखिर जनता की जेब पर डाका डालने की यह खुली छूट कब तक मिलेगी? जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट जैसी गरिमामयी संस्था और तमाम बड़े सरकारी परिसरों में पार्किंग पूरी तरह नि:शुल्क है, तो इन कमर्शियल मॉल्स को जनता को लूटने का लाइसेंस किसने दे दिया?
मॉल प्रबंधन की इस मनमानी और तानाशाही के खिलाफ अब ‘सर्व छत्तीसगढ़िया समाज’ ने मोर्चा खोल दिया है। समाज के प्रतिनिधियों ने सीधे कलेक्टर दरबार में दस्तक देकर लिखित शिकायत सौंपी है और इस अवैध धंधे पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
सवाल: जब प्रदेश की शीर्ष उपभोक्ता अदालत ने फैसला सुना दिया है, तो बिलासपुर प्रशासन किस बात का इंतजार कर रहा है? क्या रसूखदार मॉल संचालकों के आगे नियम बौने साबित हो चुके हैं?
यह मामला अब सिर्फ चंद रुपयों का नहीं, बल्कि आम जनता के उपभोक्ता अधिकारों और कानून के इकबाल का है। देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर जागता है या फिर रसूखदारों के आगे नतमस्तक होकर जनता को यूं ही लुटने के लिए छोड़ देता है।




