खुद की कार्यालय में बिजली गुल तो मंत्री जी को आई याद, फिर बिजली अधिकारियों की लगी क्लास .

बिलासपुर /छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती ने आम जनता का जीना मुहाल कर रखा है। लेकिन सिस्टम की नींद तब खुली, जब खुद केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के कार्यालय की बत्ती बार बार गुल हो गई! तब तक आम जनता ‘चल समारू, चल बुधारू’ की तर्ज पर अंधकार और उमस झेलने को मजबूर थी। एक पुरानी कहावत है—**”जब अपने ऊपर आती है, तब नानी याद आती है।”** जैसे ही मंत्री जी को बिजली गुल होने का दर्द महसूस हुआ, पावर का करंट सीधे बिजली विभाग के बड़े अफसरों तक पहुंच गया।
जनता बेहाल, मंत्री लाल: जब अपने पर आई तो अफसरों की शामत आई!
बिलासपुर समेत पूरे प्रदेश में गांव से लेकर वीआईपी इलाकों तक अघोषित बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग का तमाशा चल रहा है। जनशिकायतों के अंबार के बीच, मंत्री तोखन साहू ने अधिकारियों की आपात समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक क्या थी, अफसरों की ‘क्लास’ थी! मंत्री जी ने सख्त लहजे में अल्टीमेटम दिया कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने दोटूक कहा कि अगर भविष्य में ऐसी शिकायतें दोबारा आईं, तो गाज सीधे जिम्मेदार अधिकारियों पर गिरेगी।
बड़ा सवाल: क्या मंत्री जी की इस कड़क फटकार के बाद बिजली विभाग अपनी ढर्रे पर चल रही कार्यप्रणाली को सुधारेगा? क्या वाकई आम जनता को इस भीषण गर्मी में कोई राहत मिलेगी, या फिर हर साल की तरह यह चेतावनी भी सिर्फ एक कागजी घुड़की बनकर रह जाएगी? नजरें अब विभाग के अगले एक्शन पर टिकी हैं।




