रहने को घर दिया या नर्क में धकेल दिया? महिला बोली—ऐसे जीवन से अच्छा हमें बम से उड़ा दो …

बिलासपुर : गरीबों को छत देने का दावा करने वाली सरकार की महत्वाकांक्षी आवास योजना बिलासपुर के अशोकनगर में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यहां के निवासियों के लिए सरकारी पक्का मकान राहत बनने के बजाय एक भयानक दुःस्वप्न में तब्दील हो चुका है।
अशोकनगर के आवासों में रह रहे परिवारों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं और धांधली की गई हैं। मामूली बारिश में ही छतों से पानी टपकने लगता है और पूरे कमरे जलमग्न हो जाते हैं। पिछले चार सालों से बुनियादी सुविधाओं की बाट जोह रहे पीड़ित परिवारों का कहना है कि यहां न सोने की जगह बची है और न खाना बनाने का ठिकाना।
योजना की शुरुआत में टाइल्स और आधुनिक सुविधाओं वाले आलीशान आशियाने का सपना दिखाया गया था। लेकिन हकीकत यह है कि आज लोग बिना हीटर व भारी मशीनों के उपयोग के भी 500 से 1000 रुपये तक आ रहे बिजली बिलों की मार झेल रहे हैं। दिहाड़ी मजदूरी और झाड़ू-पोछा कर पेट पालने वाली महिलाओं का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है।
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि इससे तो उनकी पुरानी झुग्गी-झोपड़ियां ही बेहतर थीं, जहां कम से कम बच्चों को सुलाने के लिए सूखी जगह मिल जाती थी। आक्रोशित महिलाओं ने सरकार और प्रशासन पर सीधा तीखा हमला बोलते हुए कहा, “अधिकारी और नेता जरा यहां आकर रहकर दिखाएं। गरीबी हटाने के नाम पर गरीबों को ही मिटाया जा रहा है, इससे अच्छा सरकार हमें बम से उड़ा दे।”
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की अनदेखी से तंग आकर निवासियों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा है और जल्द से जल्द मरम्मत तथा समस्याओं के निदान की मांग की है।



