थाना परिसर में शराब और बिखरी बोतलें:नियम सिर्फ जनता के लिए? थाने में शराब, उठे सवाल..

बिलासपुर। कानून व्यवस्था का ढिंढोरा पीटने वाली बिलासपुर पुलिस का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जिसने खाकी की गरिमा को तार-तार कर दिया है। सोशल मीडिया पर सिविल लाइन थाने का एक शर्मनाक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वहां पदस्थ आरक्षक मनोज साहू थाना परिसर के भीतर ही नशे में धुत्त होकर अचेत पड़ा हुआ है। हद तो तब हो गई जब आरक्षक के ठीक बगल में शराब और बीयर की खाली बोतलें बिखरी दिखाई दीं। रक्षक का यह रवैया पुलिसिया तंत्र की घोर अनुशासनहीनता और खोखलेपन को उजागर करता है।
यह पूरी घटना पुलिस प्रशासन के दोहरे चरित्र पर एक करारा तमाचा है। सवाल यह उठता है कि जो पुलिस जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाकर ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ के नाम पर आम नागरिकों की जेब ढीली करती है, उन्हें कानून का पाठ पढ़ाती है, वही पुलिस आखिर किस अधिकार से न्याय के मंदिर यानी थाने को मयखाने में तब्दील कर रही है? क्या नियम-कायदे सिर्फ लाचार जनता के लिए हैं और वर्दीधारियों को खुलेआम मनमानी की छूट है? सुरक्षा के केंद्र में इस तरह शराब की बोतलें सजना बेहद निंदनीय और शर्मनाक है।
इधर, मामला बढ़ने पर पुलिस अधिकारियों ने हमेशा की तरह ‘पुरानी वीडियो’ का रोना रोते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। एएसपी का कहना है कि यह वीडियो करीब एक से डेढ़ साल पुराना है आरक्षक को शराब पीने की पुष्टि नहीं हो पा रहा हैं जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल वही है कि वीडियो कितना भी पुराना हो, थाना परिसर के अंदर शराब की बोतलें पहुंचना ही सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान है। जनता अब केवल खोखले आश्वासनों से मानने वाली नहीं है, इस घोर लापरवाही पर तत्काल और सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।




