बिलासपुर

मोहब्बत की मिली ऐसी खौफनाक सजा… जीते जी मार दिया, अपनों ने ही कर डाला मृत्यु भोज .

बिलासपुर। दिल दहल जाता है यह सोचकर कि जिस मोहब्बत को खुदा की इबादत कहा गया, उसी मोहब्बत के मुकद्दर में इस कदर दर्द और जिल्लत लिख दी जाएगी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सामाजिक क्रूरता की एक ऐसी खौफनाक दास्तान सामने आई है, जिसने इंसानियत को रोने पर मजबूर कर दिया है। यहाँ पांच बालिग जोड़ों ने एक-दूसरे का हाथ थामने की ‘खता’ क्या की, समाज के बेरहम ठेकेदारों ने उनके हंसते-खेलते परिवारों की जिंदगी को जीते जी जहन्नुम बना दिया।
मामला मस्तूरी इलाके का है, जहाँ अंतर्जातीय विवाह करने वाले प्रेमियों पर समाज का ऐसा कहर टूटा कि आँखें नम हो जाएं। जिन अपनों ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उन्हीं ने रिश्तों का कत्ल कर दिया। मोहब्बत के इन दुश्मनों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए, जिंदा इंसानों का दशगात्र कर दिया और जीते जी उनका ‘मृत्यु भोज’ कराकर उन्हें हमेशा के लिए मरा हुआ घोषित कर दिया।
तड़पते परिवार, सिसकती मोहब्बत:
दाने-दाने को मोहताज: पीड़ितों का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया है। राशन दुकान से अनाज लेने पर रोक है और मजदूरी तक छीन ली गई है।                                     अपनों के कुएं से पानी भी नसीब नहीं: जिन गलियों में बचपन बीता, आज वहीं के सार्वजनिक कुओं से दो बूंद पानी लेने की भी इजाजत नहीं है।
खौफ के साए में कैद जिंदगी: मौत की लगातार मिल रही धमकियों के बीच, ये बेकसूर परिवार अपने ही घरों में खौफ और बेबसी के आंसू रोते हुए कैद हैं।
“क्या अपनी पसंद से जीने का हक मांगना इतना बड़ा गुनाह है कि समाज किसी को जीते जी दफन कर दे? ये कैसी रूढ़िवादी बेड़ियाँ हैं, जो प्यार की खुशबू को खौफ के बारूद में बदल रही हैं?”

सिसकते और तड़पते हुए इन पांचों परिवारों ने अब कलेक्टर और एसपी के सामने झोली फैलाकर न्याय और जिंदगी की भीख मांगी है। कानून और प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा इम्तिहान है कि क्या वो इन टूटते दिलों और बिखरते परिवारों को समाज के इस अमानवीय खंजर से बचा पाएंगे?

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