‘डिजिटल इंडिया’ में पानी की बूंद-बूंद को तरसते पीएम आवास के गरीब, छुआछूत और भेदभाव का शिकार .

बिलासपुर (छत्तीसगढ़):एक तरफ ‘सबका साथ, सबका विकास’ का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं न्यायधानी बिलासपुर के बंधवापारा (विधानी चौक) स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के निवासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि यहाँ के गरीब, मजदूर, बुजुर्ग और बच्चे हर दिन पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए एक-दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं।
पीड़ित नागरिकों का आरोप है कि पुराने आवास वाले उन्हें पानी लेने नहीं देते। हद तो तब हो जाती है जब रोजी-रोटी कमाने वाले इन मजदूरों को सामाजिक भेदभाव और छुआछूत जैसी कुप्रथाओं का सामना करना पड़ता है। दूसरी जगह पानी मांगने पर दुत्कार दिया जाता है। महापौर पूजा विधानी के घर के ठीक सामने रहने वाले इन नागरिकों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। चौथी मंजिल पर रहने वाले लाचार बुजुर्ग और बच्चे बाल्टियाँ उठाने में असमर्थ हैं, जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई है।
नेताओं के चक्कर काटकर थक चुके हैं लोग
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर समस्या को लेकर पीड़ित लोग जोन कार्यालय तोरवा, स्थानीय पार्षद और खुद महापौर के दफ्तर के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं, लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। एसी कमरों में बैठे साहबों को जनता की यह चीख सुनाई नहीं दे रही।
जनता की सीधी मांग:
* तत्काल नए नल कनेक्शन और बोर सुविधा की व्यवस्था हो।
* परिसर की साफ-सफाई और जगह का घेराव (बाउंड्रीवॉल) कराया जाए।
यदि प्रशासन ने इस ‘जल संकट’ और सामाजिक प्रताड़ना पर तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए, तो यह आक्रोश किसी बड़े जनांदोलन या कानून-व्यवस्था की स्थिति में बदल सकता है। व्यवस्था कब जागेगी?




