VIP की सुरक्षा में ‘सुपरफास्ट’, आम जनता के लिए ‘नो नेटवर्क’?

रायपुर। राजधानी में सोमवार सुबह कानून-व्यवस्था की जो धज्जियां उड़ीं, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि अपराधियों के हौसले बुलंदियों पर हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक जैसे हाई-प्रोफाइल नेता से सिविल लाइन जैसे पॉश इलाके में मोबाइल लूट लिया गया। बाइक सवार बदमाश मणिकांत ध्रुव ने झपट्टा मारा और फरार हो गया।
विपक्ष के चौतरफा हमलों और सरकार की साख पर आए बट्टे के बाद हरकत में आई रायपुर पुलिस ने महज 8 घंटे में आरोपी को दबोच लिया। दर्जनों सीसीटीवी खंगाले गए, टीमें दौड़ाई गईं और मोबाइल व बाइक बरामद कर ली गई। पुलिस की इस ‘सुपरफास्ट’ कार्रवाई की चर्चा हर तरफ है, लेकिन इस कामयाबी के पीछे एक कड़वा और तीखा सच भी छिपा है।
पुलिस और आम नागरिक के लिए तीखे सवाल:

VIP वर्सेस आम आदमी: धरमलाल कौशिक का मोबाइल 8 घंटे में मिल गया, यह काबिलेतारीफ है। लेकिन सवाल यह है कि रोज़ाना रायपुर की सड़कों पर आम नागरिकों, महिलाओं और छात्रों से जो मोबाइल और चेन लूटी जाती हैं, उनकी फाइलें थानों में धूल क्यों फांकती रहती हैं? क्या पुलिस की यह ‘रॉकेट स्पीड’ सिर्फ नेताओं और वीआईपी के मामलों के लिए ही आरक्षित है?
स्मार्ट सिटी या अपराधियों का अड्डा?: पीडब्ल्यूडी आर्च ब्रिज जैसे वीआईपी रूट पर, जहाँ सुबह-शाम वीआईपी वॉक करते हैं, वहाँ एक रैपिडो चालक इतनी आसानी से वारदात को अंजाम देकर निकल जाता है। यह पुलिस की गश्त और इंटेलिजेंस की पोल खोलने के लिए काफी है।
असुरक्षित आम नागरिक: जब सूबे के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ही अपनी राजधानी की सड़कों पर सुरक्षित नहीं हैं, तो देर रात काम से लौटने वाली महिलाओं और आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।
नसीहत रायपुर पुलिस की इस मुस्तैदी का स्वागत है, लेकिन न्याय और सुरक्षा का यह तराजू सबके लिए बराबर होना चाहिए। पुलिस अपनी पीठ थपथपाना बंद करे और यही ‘8 घंटे वाली फुर्ती’ आम जनता की शिकायतों पर भी दिखाए, तभी राजधानी सही मायनों में सुरक्षित कहलाएगी।
