छत्तीसगढ़

पट्टा योजना से गरीबों को राहत, वर्षों से काबिज लोगों को मिलेगा मालिकाना हक..

रायपुर। प्रदेश के नगरीय निकायों में वर्षों से सरकारी जमीन पर रह रहे लोगों को राहत देने के लिए शुरू हुई पट्टा योजना अब राजनीतिक चर्चा का विषय बनती जा रही है। सरकार ने 2017 से पहले से काबिज पात्र लोगों को पट्टा देने के लिए सर्वे कार्य शुरू कर दिया है, जिसे 15 अगस्त 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस योजना के तहत नगर निगम क्षेत्रों में 600 वर्गफीट और नगर पालिका एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में 800 वर्गफीट तक कब्जाधारियों को पात्र माना जाएगा। पात्र हितग्राहियों को 30 साल के लिए पट्टा दिया जाएगा, जिसे आगे नवीनीकृत किया जा सकेगा। हालांकि, जिनके पास पहले से मकान है या जिन्होंने तालाब, नाले, ग्रीन बेल्ट और सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा किया है, वे इस योजना से बाहर रहेंगे।

पट्टा योजना पर सियासत गरमाने के आसार, गरीबों को राहत या राजनीतिक दांव?

कब्जे के प्रमाण के लिए सरकार ने कुछ दस्तावेज भी तय किए हैं। इनमें मतदाता सूची में नाम, बिजली या टेलीफोन बिल, संपत्तिकर या समेकित कर रिकॉर्ड, जलकर भुगतान दस्तावेज, भवन या दुकान अनुज्ञा और पांच साल पुराने आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस को मान्य माना जाएगा।

इधर, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पहले भी आवाज उठाई थी और अपने कार्यकाल में सर्वे व प्रारूप तैयार कराया था। अब भाजपा सरकार द्वारा इसे लागू किए जाने से सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह योजना जहां एक ओर गरीबों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, वहीं आने वाले समय में यह चुनावी मुद्दा भी बन सकती है।

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