
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर जिले के तखतपुर क्षेत्र में कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज के विवादित बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद शुक्रवार और शनिवार को और अधिक गहरा गया। सतनामी समाज द्वारा कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में लगातार प्रदर्शन हो रहे थे। आज शनिवार, 15 नवंबर को पुलिस ने आशुतोष चैतन्य को गिरफ्तार कर स्थानीय न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कथावाचक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसे सतनामी समाज ने अपनी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। वीडियो वायरल होने के बाद बुधवार को तखतपुर थाने का घेराव करते हुए बड़ी संख्या में लोगों ने कथावाचक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बढ़ते दबाव के बीच पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 353(2) के तहत अपराध दर्ज किया और वीडियो को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा। बाद में आशुतोष चैतन्य ने एक वीडियो जारी कर समाज से माफी मांगी और कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत करना नहीं था।
लेकिन सतनामी समाज ने उनकी माफी को अपर्याप्त बताते हुए गिरफ्तारी पर ही आंदोलन समाप्त करने का आश्वासन दिया था। शनिवार को जब पुलिस उन्हें अदालत में पेश करने पहुंची, तो परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। इसके बावजूद वातावरण तनावपूर्ण हो गया।
चश्मदीदों के अनुसार, न्यायालय परिसर में कुछ असामाजिक तत्वों ने अभद्र भाषा का उपयोग करते हुए पुलिस को चुनौती देने की कोशिश की। इस दौरान खुद को बड़ा “वरिष्ठ गौसेवक हिंदू संगठन” बताने वाले कुछ लोगों ने भी कोर्ट परिसर में पुलिस और प्रशासन को खुलेआम चेतावनी देते हुए नारेबाजी की, जिससे माहौल और अधिक गर्म हो गया। दूसरी ओर सतनामी समाज के प्रदर्शनकारी भी आक्रोशित दिखाई दिए, जिससे भिड़ंत जैसी स्थिति बन गई।
पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को समझाइश देते हुए भीड़ को नियंत्रित किया और किसी बड़ी घटना को टाल दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि न्यायालय परिसर में शांति भंग करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल आशुतोष चैतन्य न्यायिक रिमांड में हैं और जांच जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। सतनामी समाज ने कहा है कि जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा।




