सीपत

भीषण गर्मी में आदिवासियों के आशियानों पर चला वन विभाग का बुलडोजर, खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर .

बिलासपुर : जिले के सीपत तहसील अंतर्गत ग्राम धौंराकोना (उड़ांगी) में वन विभाग द्वारा की गई एकतरफा कार्रवाई के बाद तनाव और आक्रोश का माहौल है। विभाग ने बिना किसी वैकल्पिक आवास व्यवस्था के, 50 वर्षों से रह रहे गरीब धनवार (आदिवासी) समुदाय के मकानों को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पीड़ित परिवार इस भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
पीड़ित तसीली बाई (60 वर्ष), छतकुंवर (34 वर्ष) और सुखउराम (65 वर्ष) ने कलेक्टर को सौंपे गए शिकायती पत्र में बताया कि वे पीढ़ियों से यहाँ रहकर मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे थे। वन विभाग ने बीते 15 मई 2026 को उनके घरों पर नोटिस चिपकाया और महज तीन दिन बाद, 18 मई को उनके मकानों को तोड़ दिया।

भेदभाव का आरोप
पीड़ितों का कहना है कि वन विभाग ने ‘सागौन प्लांटेशन’ की जमीन होने का हवाला देकर यह कार्रवाई की है, जबकि उनके मकान इस प्लांटेशन के बनने से पहले से मौजूद थे। आदिवासियों ने विभाग पर गंभीर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि उसी क्षेत्र में यादव समाज के अन्य लोगों (शत्रुहन, भुजबल, जीतराम आदि) के भी मकान निर्मित हैं, जिन्हें छुआ तक नहीं गया। केवल आदिवासी परिवारों को निशाना बनाकर बेघर किया गया है।

न्याय की गुहार
बुजुर्ग और महिलाएं इस चिलचिलाती धूप में बिना छत, भोजन और पानी के अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं। पीड़ितों ने कलेक्टर महोदय से वन विभाग की इस अवैधानिक व एकतरफा कार्रवाई की उच्च स्तरीय जाँच करने और उनके लिए तत्काल रहने (आवास) की व्यवस्था कराने की मांग की है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page