खाकी लहूलुहान: जब बिलासपुर में ‘रक्षक’ ही नहीं सुरक्षित, तो जनता कैसे रहेगी महफूज .

बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में अपराधियों के हौसले इस कदर सातवें आसमान पर हैं कि अब उन्हें कानून के रखवालों का भी खौफ नहीं रहा। बुधवार रात सिविल लाइन थाना क्षेत्र के कुदुदंड में जो कुछ हुआ, उसने पूरे पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है। जनता की सुरक्षा का दम भरने वाली खाकी खुद अपराधियों के आगे बेबस और लहूलुहान नजर आई।
बीच-बचाव करने गई पुलिस पर जानलेवा हमला
घटना के मुताबिक, डायल-112 की टीम को कुदुदंड में एक घरेलू विवाद की सूचना मिली थी। आरक्षक मोरज सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे, जहाँ सागर छात्रवानी नामक युवक शराब के नशे में धुत्त होकर अपने ही पिता को बेरहमी से पीट रहा था।
जैसे ही आरक्षक मोरज सिंह ने बीच-बचाव कर बुजुर्ग पिता को बचाने की कोशिश की, कलयुगी बेटे का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने आव देखा न ताव, पास रखे डंडे से आरक्षक मोरज सिंह पर ताबड़तोड़ जानलेवा हमला कर दिया। सिर और आंख पर हुए इस वार से आरक्षक लहूलुहान हो गया और उसकी वर्दी खून से लाल हो गई।
अस्पताल में बदहवास जवान, आरोपी गिरफ्तार
घायल जवान को आनन-फानन में सिम्स (CIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी हालत समान्य बनी हुई है। दर्द और सदमे से बदहवास जवान अस्पताल के बिस्तर पर बार-बार अपने पिता को पुकारता रहा—यह मंजर बेहद मर्मस्पर्शी और कानून व्यवस्था पर करारा तमाचा था। हालांकि, घटना के बाद हरकत में आई सिविल लाइन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी सागर छात्रवानी को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
तीखा सवाल: कानून का डर खत्म क्यों?
यह वारदात महज़ एक अपराध नहीं, बल्कि बिलासपुर की कानून व्यवस्था पर गहरा धब्बा है। जब वर्दीधारी पुलिसकर्मी ही ड्यूटी के दौरान सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता अपनी सुरक्षा की उम्मीद किससे करे? अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ इस कदर गायब हो चुका है कि वे सरेआम रक्षकों को निशाना बना रहे हैं। प्रशासन को अब कड़े कदम उठाने होंगे, वरना बिलासपुर ‘अपराधियों का गढ़’ बनने में देर नहीं लगेगी।