करोड़ों फूंककर भी ‘स्मार्ट’ नहीं हुआ बिलासपुर: फुटपाथ पर कब्जा, मौत के साये में राहगीर …

बिलासपुर। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाकर चमचमाते फुटपाथ तो बना दिए गए, लेकिन आज वे राहगीरों के नहीं, बल्कि अतिक्रमणकारियों के ऐशगाह बन चुके हैं। नगर निगम के दावों की हवा निकालते हुए शनिचरी बाजार, दयालबंद, पुराना बस स्टैंड, लिंक रोड और सत्यम चौक जैसे इलाकों के फुटपाथों पर ठेले, खोमचे, फल दुकानों और चाट-समोसे के स्टॉलों का राज है। कई जगह तो दुकानदारों ने फुटपाथ को अपनी पैतृक संपत्ति मानकर स्थायी निर्माण तक कर लिया है।
सवाल यह है कि जब सर्वोच्च न्यायालय स्पष्ट कह चुका है कि सुरक्षित फुटपाथ पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, तो बिलासपुर नगर निगम इस अधिकार का गला क्यों घोंट रहा है?
अतिक्रमण के इस मकड़जाल के कारण पैदल चलने वाले लोग व्यस्त और बेकाबू सड़कों पर अपनी जान हथेली पर रखकर चलने को मजबूर हैं। आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन निगम का कुंभकरणी दस्ता केवल ‘दिखावे की कार्रवाई’ का कोरम पूरा कर सो जाता है। आज फुटपाथ खाली कराया जाता है, तो कल फिर वहां दुकानें सज जाती हैं। यह आंख मिचौली का खेल बिना किसी आंतरिक सांठगांठ के मुमकिन नहीं है।
नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे का यह बयान कि “कार्रवाई जारी है और सख्ती की जाएगी”, अब कागजी घुड़की से ज्यादा कुछ नहीं लगता। जनता खोखले आश्वासनों से ऊब चुकी है। बिलासपुर को केवल कागजों पर ‘स्मार्ट’ बनाने के बजाय धरातल पर राहगीरों को उनका हक वापस दिलाना होगा, वरना करोड़ों का यह बजट सिर्फ भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की भेंट चढ़ा हुआ ही माना जाएगा।




