बिलासपुर सेंट्रल जेल में पांचवी खौफनाक मौत,जेल या जिंदा कब्रिस्तान?बलि के बाद जागा सोया तंत्र …

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। सुरक्षा का दंभ भरने वाली बिलासपुर सेंट्रल जेल अब सुधारगृह नहीं, बल्कि लापरवाही और खौफ का अड्डा बन चुकी है। बुधवार शाम यहाँ जो हुआ, उसने जेल तंत्र के खोखले दावों को जिंदा जला दिया। चांपा (बम्हनीडीह) निवासी कैदी राहुल उर्फ विकेश कंवर ने गैसीफायर प्लांट की 20 फीट गहरी जलती भट्ठी में कूदकर जान दे दी। यह महज आत्महत्या नहीं, बल्कि जेल प्रशासन की सरपरस्ती में हुई पांचवीं मौत है, जो चीख-चीखकर कह रही है कि अंदर सब कुछ राम भरोसे है!
कड़ा सवाल जेलर और निकम्मे गार्डों से है—क्या सुरक्षा कर्मचारी आँखें मूँदकर कुंभकर्णी नींद सो रहे थे? एक सजायाफ्ता कैदी मौत के उस खौफनाक चैंबर तक कैसे पहुँच गया? सायरन बजाने और औपचारिकता की ‘जांच-जांच’ खेलने से अधिकारियों के हाथ पर लगा यह खून का धब्बा नहीं धुलेगा। क्या यही है आपकी ‘हाई सिक्योरिटी’? या सुरक्षा के नाम पर जनता के पैसों की बर्बादी की जा रही है?
गुमराह और अपराधियों के लिए कड़वा सच:
लड़ाई-झगड़े और अपराध की राह चुनने वालों, आँखें खोलकर इस खौफनाक अंजाम को देख लो! जो जेल तुम्हारे सुधार का दावा करती है, वो तुम्हारी लाश की सुरक्षा भी नहीं कर सकती। पल भर का तैश तुम्हारे परिवार को उम्र भर का दर्द देगा। अपने बच्चों और अपनों के खातिर जुर्म की दुनिया को ठोकर मारो, वरना इस बदहाल और बेरहम तंत्र में तुम्हारी जिंदगी का अंत सिर्फ राख बनकर होगा!




