बिलासपुर बाल संप्रेक्षण गृह: सुधार गृह या मौत का अड्डा? सुरक्षा व्यवस्था की फिर खुली पोल …

बिलासपुर/ न्यायधानी बिलासपुर का सरकंडा स्थित बाल संप्रेक्षण गृह एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन किसी सुधार के लिए नहीं, बल्कि अव्यवस्था और लापरवाही के खूनी खेल के कारण। स्वतंत्रता दिवस के दिन रायगढ़ के धर्मजयगढ़ से दुष्कर्म के मामले में लाए गए ग्राम किरमिडांड 17 वर्षीय किशोर (शुभम अगरिया) की वॉशरूम की चौखट पर गमछे से लटकी लाश मिलने से हड़कंप मच गया है। महज तीन दिन के भीतर संप्रेक्षण गृह के अंदर संदिग्ध परिस्थितियों में हुई इस मौत ने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी चार बंदियों द्वारा चौकीदार की निर्मम हत्या कर फरार होने की सनसनीखेज वारदात हो चुकी है। उस समय भी सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लंबे-चौड़े दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सुधार गृह का ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है।
अहम सवाल जो प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हैं:
* निगरानी में इतनी बड़ी चूक क्यों? अति-संवेदनशील माने जाने वाले इस गृह में किशोर वॉशरूम तक गमछा लेकर कैसे पहुंच गया और फांसी लगा ली?
* कहाँ सो रही थी सुरक्षा? क्या यहां बंदियों की नियमित निगरानी और सीसीटीवी से मॉनिटरिंग सिर्फ कागजों पर ही सीमित है?
* सुधार या प्रताड़ना? जब पूर्व में हत्या जैसी जघन्य वारदात हो चुकी थी, तो फिर दोबारा ऐसी चूक का जिम्मेदार कौन है?
फिलहाल सरकंडा पुलिस मामले की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या हर हादसे के बाद जांच का नाटक ही चलता रहेगा या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?




