
बिलासपुर / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्मार्ट मीटर का मुद्दा अब महज बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों से निकलकर सीधा जनता के घरों की चौखट तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने प्रदेश सरकार और बिजली विभाग की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए वार्ड-वार्ड ‘घर-घर सर्वे अभियान’ तेज कर दिया है। पार्षद और पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर उपभोक्ताओं से पुराने और नए बिजली बिलों का हिसाब मांग रहे हैं।
कांग्रेस का सीधा आरोप है कि डिजिटल सुधार के नाम पर थोपे जा रहे स्मार्ट मीटरों से आम जनता पर महंगाई का दोहरा चाबुक चल रहा है। मीटर बदलते ही बिजली के बिलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
पार्टी ने महतारी वंदन योजना पर तंज कसते हुए इसे सरकार का “एक हाथ से देना, दूसरे हाथ से छीनना” करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि एक तरफ महिलाओं को हर महीने ₹1,000 की सहायता का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, तो दूसरी तरफ स्मार्ट मीटर के जरिए ₹2,000 तक की अतिरिक्त चपत लगाई जा रही है।
नए कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर की कथित अनिवार्यता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस अब इस सर्वे फॉर्म के जरिए मिले आंकड़ों का एक ठोस दस्तावेज तैयार कर सरकार को घेरने की तैयारी में है। देखना यह होगा कि सर्वे के ये आंकड़े सामने आने के बाद सरकार इस चौतरफा हमले का क्या जवाब देती है, लेकिन फिलहाल स्मार्ट मीटर ने बिलासपुर की सियासत का पारा चढ़ा दिया है।




