
बिलासपुर। बुधवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में मसीही समाज के लोग मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन किया। पुलिस बल की मौजूदगी में कई बार तनाव की स्थिति बनी। इस दौरान मिशन अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पीड़ित पक्ष के अरशद हुसैन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से दोपहर 12 बजे मौखिक आदेश मिल चुका था, लेकिन कॉपी पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया।

जानकारी के अनुसार, मिशन अस्पताल की लीज वर्ष 2014 में समाप्त हो गई थी। नवीनीकरण के लिए 2024 में आवेदन किया गया था, जिसे नजूल न्यायालय ने खारिज कर दिया। बाद में हाईकोर्ट ने भी प्रशासन के फैसले को सही ठहराया। इसके खिलाफ मिशन बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई करते हुए मिशन बोर्ड को अंतरिम राहत दी और मौजूदा स्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए। साथ ही कोर्ट ने आदेश की कॉपी बिलासपुर कलेक्टर को तत्काल भेजने के निर्देश दिए।

हालांकि, कोर्ट की रोक से पहले नगर निगम प्रशासन ने अस्पताल परिसर के आसपास 50 से अधिक मकानों को तोड़ दिया था। 1885 में स्थापित यह मिशन अस्पताल क्रिश्चियन वुमन बोर्ड ऑफ मिशन को धार्मिक व सामाजिक कार्यों के लिए दी गई भूमि पर संचालित था, जहां वर्तमान में “न्यू वंदना अस्पताल” के नाम से सेवाएं दी जा रही थीं।




