बिलासपुर

बैराज तैयार फिर भी अरपा का पानी बेकार, सिंचाई विभाग की नाकामी पर कांग्रेस का हमला …

बिलासपुर। शहर के बीचों-बीच अरपा नदी सिर्फ बह नहीं रही, बल्कि सिस्टम की नाकामी और बदइंतजमी पर आंसू बहा रही है। अरपा में जलभराव के लिए बनाए गए पचरीघाट और शिवघाट बैराज कागजों और बयानों में भले बनकर ‘तैयार’ हों, लेकिन धरातल पर नदी का बेशकीमती पानी यूं ही बेकार बह रहा है। नदी में तेज उफान है, गेट बंद हों तो महज 24 घंटे में जलभराव हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
वजह? रिटेनिंग वॉल का अधूरा काम! सिंचाई विभाग की आधी-अधूरी तैयारी का आलम यह है कि अगर अभी बैराज के गेट बंद किए जाएं तो पानी रिहाइशी इलाकों और किनारों में घुसने का खतरा है। जिस काम को सालों पहले पूरा हो जाना चाहिए था, वह अब भी कछुआ चाल से रेंग रहा है। विभाग का रटा-रटाया तर्क है कि ‘अक्टूबर तक पानी रहेगा, काम पूरा कर जलभराव कर लेंगे’। लेकिन सवाल यह है कि मानसून के इस भरपूर पानी को बर्बाद करने का हक प्रशासन को किसने दिया?
इधर, इस घोर लापरवाही पर राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सीधा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि अरपा का वाटर लेवल सुधारने का यह प्रोजेक्ट करीब तीन साल देरी से चल रहा है और आज भी आधा-अधूरा है। यह सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की अकर्मण्यता और जनता के पैसों की बर्बादी है।
सामने लबालब पानी है, सामने बैराज खड़ा है… फिर भी बिलासपुर की प्यासी अरपा और शहरवासी जलभराव के एक-एक कतरे को तरस रहे हैं। आखिरकार अफसरों की नींद कब खुलेगी और जनता को इस बैराज का असली फायदा कब मिलेगा?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page