बिलासपुर में बारिश के साथ बढ़ा सर्पदंश का खतरा, सिम्स की चेतावनी: झाड़-फूंक छोड़ तुरंत पहुंचे अस्पताल …

बिलासपुर जिले में मानसून की शुरुआत के साथ ही स्नेक बाइट (सर्पदंश) के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बिलासपुर के छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में हर दिन सांप के काटने के मरीज पहुंच रहे हैं, जिसके बाद डॉक्टरों ने आम जनता के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है।
सिम्स अस्पताल के अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के अनुसार, बारिश के मौसम में सर्पदंश के मामलों में तीन गुना इजाफा हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि जून महीने में जहां सर्पदंश के लगभग 30 मरीज इलाज के लिए आए थे, वहीं जुलाई में यह संख्या बढ़कर करीब 90 तक पहुंच गई। समय पर अस्पताल पहुंचने वाले अधिकांश मरीज पूरी तरह ठीक होकर घर लौट चुके हैं, लेकिन झाड़-फूंक या घरेलू इलाज के चक्कर में देरी करने वाले मरीजों की हालत गंभीर हो रही है।
सावधानी और बचाव के मुख्य बिंदु:
* कीमती समय न गवाएं: स्नेक बाइट के बाद हर एक मिनट महत्वपूर्ण होता है। झाड़-फूंक या टोने-टोटके के बजाय सीधे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं।
* अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था: सिम्स में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) और सभी जरूरी जीवनरक्षक दवाएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
* जोखिम वाले स्थानों पर सतर्कता: खेतों, झाड़ियों, कच्चे रास्तों और जलभराव वाले इलाकों में जाते समय जूते और टॉर्च का इस्तेमाल करें।
डॉक्टरों ने स्पष्ट अपील की है कि सर्पदंश के मामले में केवल त्वरित डॉक्टरी इलाज ही जान बचा सकता है। बारिश के मौसम में बरती गई थोड़ी सी सतर्कता और सही समय पर लिया गया फैसला ही इस खतरे से सबसे बड़ा बचाव है।




