
मल्हार/बिलासपुर:शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मल्हार में शिक्षा को धंधा और स्कूल को तानाशाही का गढ़ बना दिया गया है। भ्रष्ट तंत्र और बदतमीज शिक्षकों की प्रताड़ना से तंग आकर आज स्कूली बच्चे अपनी फरियाद लेकर सीधे कलेक्ट्रेट की चौखट पर दहाड़ पड़े।
प्रिंसिपल का फरमान: चंदा दो वरना टीसी काटो!
प्राचार्य वेद प्रसाद शुक्ला पर सीधे-सीधे डाका डालने का आरोप है। 500 रुपये की फीस के नाम पर गरीब बच्चों से 1250 से लेकर 1750 रुपये तक ऐंठे जा रहे हैं। हद तो तब हो गई जब क्लास में पंखा लगाने के नाम पर अवैध वसूली की गई और पैसे न देने पर टीसी काटकर भविष्य बर्बाद करने की सीधी धमकी दी गई।
छुआछूत, अमानवीयता और गंदी नजर!
स्कूल का बाकी स्टाफ भी इस पाप में बराबर का भागीदार है:
* वर्मा मैडम: बच्चों के साथ छुआछूत और भेदभाव करती हैं, पूरे समय फोन में व्यस्त रहकर बदतमीजी पर उतारू रहती हैं।
* देवांगन मैडम: अमानवीयता की हद पार करते हुए छात्राओं को जरूरत के समय सेनेटरी पैड तक देने से इनकार कर देती हैं।
* दुबे सर: संस्कृत पढ़ाना तो दूर, क्लास में सो जाते हैं। इन पर फर्जी डिग्री रखने और छात्राओं पर गंदी नजर डालने जैसा अति-गंभीर आरोप लगा है।
डीईओ को उल्टे पांव भागना पड़ा, डिप्टी कलेक्टर ने दिया आश्वासन
शिकायतें बीईओ और डीईओ तक पहले भी पहुंची थीं, पर अफसर कान में तेल डालकर सोए रहे। आज जब आक्रोशित बच्चे कलेक्टरेट पहुंचे, तो डीईओ संदीप कुमार पांडे गोल-मोल जवाब देने लगे। बच्चों के तीखे तीरों के आगे डीईओ साहब की बोलती बंद हो गई और उन्हें कलेक्ट्रेट से उल्टे पांव भागना पड़ा!
आखिरकार स्थिति बिगड़ती देख डिप्टी कलेक्टर भवानी शंकर साव ने मोर्चा संभाला और बच्चों को सख्त कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया। गुस्से से तमतमाए छात्रों ने “हमारा प्रिंसिपल कैसा है , पागल कुत्तों जैसा हैं” के गगनभेदी नारे लगाकर पूरे परिसर को हिलाकर रख दिया।
बड़ा सवाल:
क्या ऐसे भ्रष्ट और हवस भरे माहौल में देश का भविष्य सुरक्षित है? इस पूरे जंगलराज का जिम्मेदार कौन है? क्या इन मासूमों को वाकई इंसाफ मिलेगा या फिर भ्रष्ट अधिकारियों की शह पर यह गुंडागर्दी ऐसे ही चलती रहेगी?




