
बिलासपुर। स्मार्ट सिटी के नाम पर लाखों–करोड़ों की योजनाओं का दावा करने वाली बिलासपुर नगर निगम की हकीकत वार्ड नंबर 49, नाग–नागिन तालाब क्षेत्र बहतराई की हालत सामने आते ही सवालों के घेरे में आ गई है। यहां 40 से 45 वर्षों से बसे मोहल्लेवासियों को आज तक न तो पक्की गली मिली, न नाली, न सड़क, न ही मूलभूत सुविधाओं का समुचित लाभ।
रहवासियों का कहना है कि स्मार्ट सिटी तो दूर की बात है, मोहल्ले की गली तक बनी न होने से लोग रोजाना परेशान हैं। पूर्व पार्षद से बार–बार गुहार लगाने के बावजूद केवल “बनेगा–बनेगा” का आश्वासन मिलता रहा, लेकिन हालत जस की तस बनी है। लोगों का आरोप है कि नेता–मंत्री और अधिकारियों को जहां 6 माह के भीतर बंगले और सारी सुविधाएं मिल जाती हैं, वहीं आम नागरिक वर्षों बाद भी बुनियादी सुविधा के लिए लड़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि बिजली बंद होने पर लाइन सुधारने के लिए मोहल्लेवासियों को 10–20 रुपये चंदा कर लाइनमैन को देना पड़ता है, तभी समस्या सुधरती है। वहीं मोहल्ले में लगे बोर को भी लोगों ने अपनी जेब से चंदा कर फिट कराया था, लेकिन अब निगम पानी का बिल वसूल कर रहा है।
रहवासियों का कहना है कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के बीच उनके मोहल्ले की बदहाली पर किसी की नजर नहीं पड़ती। कुछ दिन पहले मंत्रीगण ने नेशनल हाईवे निरीक्षण तो किया, लेकिन शहर की अंदरूनी समस्याएं उन्हें दिखाई नहीं दीं।
लोगों ने बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, निगम अधिकारियों और पार्षदगण से रोड–नाली, पानी–बिजली, सफाई और बीमारी से बचाव जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान की अपील की है।
अब देखना यह होगा कि बहतराई के नाग–नागिन तालाब क्षेत्र के हजारों रहवासियों को कब तक राहत मिलेगी और क्या बिलासपुर सच में ‘स्मार्ट सिटी’ कहलाने योग्य बनेगा या सिर्फ कागजों में ही स्मार्ट बना रहेगा।




