
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स (SIMS) से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। सड़क हादसे में घायल होकर इलाज के दौरान दम तोड़ चुके 64 वर्षीय गणेश सिंह सरटीया के शव को पाने के लिए परिजनों को पुलिस और अस्पताल कर्मियों की रिश्वतखोरी का सामना करना पड़ा।

मृतक के बेटे भारत सिंह सरटीया का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह सिम्स चौकी प्रभारी ढोला राम मरकाम से हाथ जोड़कर अपने पिता का शव मांगता दिख रहा है। लेकिन इंसानियत दिखाने की बजाय उससे पोस्टमार्टम के नाम पर 500 रुपए की मांग की जाती है। वहीं, मरच्यूरी के सफाईकर्मी राकेश मौर्य पर भी 300 रुपए वसूलने का आरोप है।

बेबस बेटा गांव में लोगों से पैसे जुटाने की कोशिश करता रहा ताकि अपने पिता का अंतिम संस्कार कर सके। यह पूरा घटनाक्रम अस्पताल परिसर में अधिकारियों और स्टाफ की मौजूदगी में हुआ, पर किसी ने रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई।
मामला मीडिया में आने के बाद आनन-फानन में शव परिजनों को सौंप दिया गया, लेकिन सवाल अब भी बरकरार हैं — क्या सरकारी अस्पतालों में अब लाशों की भी कीमत तय हो गई है? क्या खाकी और अस्पताल प्रशासन की मिलीभगत से रिश्वतखोरी आम बात बन चुकी है?
यह घटना न केवल सिस्टम की सड़ांध को उजागर करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि “सेवा” के नाम पर “वसूली” अब इंसानियत की लाश पर खुलेआम नाच रही है। जनता अब सिम्स प्रबंधन और पुलिस विभाग से इस शर्मनाक कृत्य पर ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।




