बिलासपुर के ‘चिट्ठी वाली माता’ मंदिर में लगती है अनोखी अर्जी: मिर्ची भजिया के भोग और चिट्ठी से पूरी होती हैं मनोकामनाएं …

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अमरईया चौक (चिंगराजपारा) का माता धूमावती मंदिर श्रद्धालुओं के बीच अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। ‘शिव शक्ति मंदिर’ के नाम से प्रसिद्ध इस धाम को भक्त ‘चिट्ठी वाली माता’ के रूप में भी पूजते हैं। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से अपनी मनोकामना पत्र (चिट्ठी) पर लिखकर माता के चरणों में अर्पित करता है, उसकी हर मुराद तीन दिनों के भीतर पूरी हो जाती है। विशेष रूप से खोया हुआ सामान वापस पाने के लिए भक्त यहाँ बड़ी संख्या में अर्जियाँ लगाते हैं।
भारत-चीन युद्ध से जुड़ा है ऐतिहासिक माहात्म्य
मध्य प्रदेश के दतिया पीठ के बाद धूमावती माता की ऐसी अद्भुत प्रतिमा केवल बिलासपुर में ही स्थापित है, जहाँ देवी एक वृद्ध महिला के रूप में विराजमान हैं। मंदिर का इतिहास 1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़ा हुआ है, जब राष्ट्र रक्षा हेतु महागुरु के निर्देश पर दतिया में माता का आवाहन व अनुष्ठान किया गया था। इसके बाद वर्ष 2005 में बिलासपुर में इस पीतांबरा पीठ धूमावती मंदिर की स्थापना की गई।
मिर्ची भजिया का अनोखा भोग और शनिवार का विशेष महत्व
माता को प्रसन्न करने के लिए यहाँ तीखा व अनोखा भोग चढ़ाया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से मिर्ची भजिया, प्याज भजिया, दही, जलेबी, पूड़ी और हलवा शामिल हैं। शनिवार के दिन मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जुटती है, वहीं नवरात्रि में अखंड ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं। महंत देवानंद जी महाराज के अनुसार, जब भक्त अन्य दरबारों से निराश हो जाते हैं, तब कलियुग की देवी माँ धूमावती उनकी अर्जी सुनकर सारे कष्ट दूर करती हैं।




