कानून सबके लिए बराबर या चेहरे देखकर कार्रवाई?राम सिंह ठाकुर की ‘गुप्त’ पेशी से बिलासपुर पुलिस की साख पर लगा दाग …
बिलासपुर। खपरगंज के चर्चित और खूनी विवाद का मुख्य आरोपी राम सिंह ठाकुर आखिरकार जेल की सलाखों के पीछे पहुँच गया है। मध्यप्रदेश के पन्ना में छिपे इस आरोपी को बिलासपुर एसीसीयू की टीम ने गिरफ्तार किया, जिसके बाद शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। जेल के बाहर समर्थकों की भारी भीड़, नारेबाजी और ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच पुलिस बल तो तैनात रहा, लेकिन इस पूरी कार्रवाई ने खाकी की निष्पक्षता पर एक बड़ा और तीखा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
यह वही खपरगंज हिंसा है जिसमें दोनों तरफ से हुए भीषण पथराव को रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा था। इस उपद्रव में तारबाहर थाना प्रभारी समेत 9 पुलिसकर्मी लहूलुहान हुए थे और अब तक 30 से अधिक आरोपियों की धरपकड़ हो चुकी है।
लेकिन असली बखेड़ा पुलिस के रवैया को लेकर शुरू हो गया है। आम जनता और दूसरे पक्ष ने पुलिस प्रशासन की लचर व पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताया है। जनता का सीधा आरोप है कि जब इसी मामले के दूसरे पक्ष के आरोपी सोहेल खान और उसके साथियों का सरेआम जुलूस निकालकर खाकी अपनी पीठ थपथपा रही थी, तो फिर मुख्य आरोपी राम सिंह ठाकुर के लिए यह ‘विशेष प्रोटोकॉल’ क्यों? न उसका जुलूस निकला, न फोटो-वीडियो सामने आने दिए गए और उल्टे उसे कड़े सुरक्षा घेरे में ‘वीआईपी’ सुरक्षा देकर जेल पहुंचा दिया गया।
कानून का यह दोहरा मापदंड चीख-चीख कर सवाल पूछ रहा है कि क्या बिलासपुर पुलिस का डंडा सिर्फ चुनिंदा चेहरों पर ही चलता है? आरोपी-आरोपी में यह भेद और चुप्पी, न्याय नहीं बल्कि पुलिस प्रशासन की लाचारी और दोहरे रवैये की पोल खोलती है।




